23 नवंबर 2012 - 20:30

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए में ईरान के दूत अली अस्ग़र सुल्तानिये ने बताया कि गुट निरपेक्ष आंदोलन के 100 से अधिक सदस्य देशों ने ईरान के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का समर्थन किया है............

गुट निरपेक्ष आंदोलन के 100 से अधिक सदस्य देशों ने ईरान के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का समर्थन किया है।अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए में ईरान के दूत अली अस्ग़र सुल्तानिये ने बताया कि गुट निरपेक्ष आंदोलन के 100 से अधिक सदस्य देशों ने ईरान के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का समर्थन किया है।उन्होंने शुक्रवार को एक साक्षात्कार में बतायाः गुट निरपेक्ष आंदोलन ने आज की बैठक में, इस्लामी गणतंत्र ईरान के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के समर्थन में पांच पृष्ठों पर आधारित बयान जारी किया जिसे अगले सप्ताह आईएईए के निदेशक मंडल की बैठक में पढ़ा जाएगा।अली अस्ग़र सुल्तानिये ने गत दस वर्षों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के समर्थन में गुट निरपेक्ष आंदोलन के पिछले दो बयानों का उल्लेख किया और इस आंदोलन के सकारात्मक दृष्टिकोण के प्रति तेहरान की ओर से आभार व्यक्त किया।  उन्होंने गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों के बीच और सहयोग व एकता की अपील की।ज्ञात रहे इस समय इस्लामी गणतंत्र ईरान, गुट निरपेक्ष आंदोलन नैम का आवर्ती अध्यक्ष है।ज्ञात रहे अमरीका और उसके कुछ घटक ईरान पर शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम की आड़ में परमाणु शस्त्रों की प्राप्ति के प्रयास का आरोप लगाते हैं और इसी आरोप के बहाने अमरीका ने ईरान पर एकपक्षीय प्रतिबंध लगा दिए हैं जबकि ईरान का कहना है कि उसकी समस्त परमाणु गतिविधियां शांतिपूर्ण हैं जो आईएईए के निरीक्षण में जारी हैं और वह परमाणु अप्रसार संधि एनपीटी के सदस्य देश के नाते शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए परमाणु ऊर्जा के प्रयोग के अपने मूल अधिकार पर बल देता है।आईएईए ने भी ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों का अनेक बार निरीक्षण किया है और उसे ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले जिससे पश्चिमी देशों के आरोपों की पुष्टि हो।इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने भी परमाणु शस्त्रों के निर्माण के वर्जित होने का फ़तवा दिया है।कितनी अजीब बात है कि मध्यपूर्व में 200 से अधिक परमाणु वारहेड्स से संपन्न ज़ायोनी शासन से पश्चिमी देश यह तक नहीं पूछते कि वह अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों के निरीक्षण की अनुमति क्यों नहीं देता और परमाणु अप्रसार संधि एनपीटी से क्यों नहीं जुड़ता। .........166